
नवरात्रि के चौथे दिन पूजा की जाने वाली माँ दुर्गा का चौथा स्वरूप है माँ कूष्मांडा। माँ कूष्मांडा जिन्हें सृष्टि की रचयिता और आदि शक्ति भी कहा जाता है, माना जाता है कि इन्होंने अंधकार में अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इनकी आठ भुजाएँ हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है और ये सिंह पर सवार रहती हैं।
माँ कूष्मांडा अपने भक्तों के रोग, शोक सब दूर करती हैं और आयु, यश, बल और आराध्य में वृद्धि देती हैं। इन्हें मालपुआ और पेठा का भोग लगाकर कहते हैं कि माँ कूष्मांडा को ये भोग बहुत पसंद है।
माँ कूष्मांडा के मंत्र:
- “ओम देवी कूष्मांडायै नमः”
- “या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्मांडा रूपेण संस्थिता नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमो नमः”
माँ कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
आप किसी भी वजह से परेशानी में हैं, तो आप पूजा को पूरी विधि विधान से अगर नहीं कर पा रहे हैं तो आप किसी भी वहम में नहीं आना है। आप अपनी परेशानी को माँ कूष्मांडा के चरणों में अर्पित करें और माँ के मंत्र का जाप करें, मानसिक जाप करें, कैसे भी जाप करें और विश्वास रखें कि माँ आपकी प्रार्थनाएँ सुन रही हैं और वो आपको आशीर्वाद जरूर देंगी।🙏🙏🌷










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