
नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए और शिव के वर पाने के लिए की जाती है। माँ कात्यायनी देवी दुर्गा का छठा स्वरूप है, जिन्हें महेश्वरी मर्दनी के रूप में भी जाना जाता है।
पुरानी कथा के अनुसार, माँ ऋषि कात्यायनी की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री के रूप में जन्म ली थी। उन्होंने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया और देवताओं को इसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी।
माँ कात्यायनी की पूजा से विवाह संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और सुखी जीवन की प्राप्ति होती है। यदि आपके विवाह में किसी तरह का विलंब हो रहा है, तो आपको माँ कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए।
माँ कात्यायनी के मंत्र:
- “ओम देवी कात्यायन्यै नमः”
- “या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमो नमः”
आप इन मंत्रों का जाप एक सौ आठ बार करें और विश्वास रखें कि माँ आपके विवाह में आने वाले जितने विलंब हैं, उन्हें दूर करेंगी।
यदि आप विवाहित हैं और विवाहित जीवन में कोई समस्या है, तो आप भी माँ कात्यायनी की पूजा कर सकते हैं। यह पूजा नवरात्र के छठे दिन या किसी भी शुक्रवार या मंगलवार से शुरू की जा सकती है।
यदि आप एक सौ आठ बार माला का जाप रोज नहीं कर पा रहे हैं, तो आप ग्यारह बार या इक्कीस बार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। 😊









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