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🌺 दिन 1 – मां शैलपुत्री : Astrologer Ruchika B. Bhasin |(Chaitra Navratri Day 1)

👉 नवरात्रि दिन 1: मां शैलपुत्री के चमत्कारी उपाय | ज्योतिषियों के विशेष टोटके 2026

Ruchika B Bhasin (Astrologer)
Contact Number : +91-91110 03036


नवरात्रि की पहली मां शैलपुत्री के बारे में:

मां शैलपुत्री नवरात्रि की पहली तारीख को पूजी जाने वाली देवी हैं। वह हिमालय की पुत्री हैं, और उनका नाम शैलपुत्री, पद्मा और सती भगवती भी है।

मां शैलपुत्री की कहानी:

मां शैलपुत्री की कहानी यह है कि वह दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थीं, और उनका विवाह शिव जी से हुआ था। एक बार दक्ष ने यज्ञ कराया, लेकिन शिव जी को नहीं बुलाया, इसलिए शिव जी की अवहेलना करने लगे। सती ने अपने पिता दक्ष की इस बात को सहन नहीं किया और यज्ञ की अग्नि में कूद गईं। इसके बाद सती ने हिमालय के घर जन्म लिया और शैलपुत्री के रूप में प्रभु शिव की प्राप्ति कर ली।

अगर आप किसी भी तरह से मां शैलपुत्री की पूजा करने में असक्षम हैं, या किसी परेशानी में हैं और पूजा नहीं कर पा रहे हैं, तो आंख बंद करके मां शैलपुत्री को याद करें, अपनी परेशानी उनके आगे रखें और उनसे मांगें कि वो आपको निडरता और दृढ़ता दें, ताकि इस परेशानी से आप बाहर निकलकर जीत को हासिल करें। एक अच्छी इंटेंशन के साथ आगे जीवन में बढ़ें और आपको मां का वो आशीर्वाद मिले, ताकि आप अपने जीवन में बहुत सारी खुशियों को प्राप्त कर सकें। ये आपको जरूर मिलेगा, आप अपनी अच्छी इंटेंशन के साथ मां शैलपुत्री को याद करें।

मां शैलपुत्री हमें निडरता, दृढ़ता सिखाती हैं:

मां शैलपुत्री हमें निडरता और दृढ़ता सिखाती हैं। वह हमें अपने जीवन में सर्वोपरि निडरता और दृढ़ता बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं।

मां शैलपुत्री के बीज मंत्र:

मां शैलपुत्री के बीज मंत्र का उच्चारण करें:
“ओम ह्रीं शैलपुत्र्यै नमः”

इस मंत्र को आइडा करें:
“या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”

जब भी आप मां शैलपुत्री की पूजा करें, चाहे एक या 108 माला की मंत्र का जाप करें, अगर आप एक माला पूरी नहीं कर सकते तो इक्कीस या ग्यारह बार इस मंत्र का उच्चारण करें और अपनी इंटेंशन्स यही रखें कि हमारे जीवन में भी हमेशा जब भी कोई परेशानी आए हम अपनी निडरता और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ते रहें।

मां शैलपुत्री का वास काशी नगरी वाराणसी में माना जाता है। वहां शैलपुत्री का एक बेहद प्राचीन मंदिर है जिसके बारे में मान्यता है कि यहां मां शैलपुत्री के सिर्फ दर्शन करने से ही भक्तजनों की मुरादें पूरी हो जाती हैं। कहा तो यह भी जाता है कि नवरात्र के पहले दिन यानि प्रतिपदा को जो भी भक्त मां शैलपुत्री के दर्शन करता है उसके सारे वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। चूंकि मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। इनके बाएं हाथ में कमल और दाएं हाथ में त्रिशूल रहता है।

मां शैलपुत्री की कहानी हमें यही सिखाती है कि सही दिशा पर चलकर अपने अंदर निडरता और दृढ़ता को बनाए रखें, चाहे जीवन कितनी भी चुनौतियां आपके लिए लाए अपनी दृढ़ता को बनाए रखें, अगर आप अपनी दृढ़ता को बनाए रखते हैं तो हर चीज पाना आपके लिए बहुत मुमकिन हो जाता है, और इसी निडरता के साथ और अपने अच्छे इंटेंशन के साथ आगे बढ़ते रहें, और इसी भाव से मां शैलपुत्री की पूजा करें।

मां शैलपुत्री की पूजा करने से हमें निडरता, दृढ़ता और शक्ति मिलती है, और हमारा जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है 😊


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