
माँ सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन पूजा करने वाली देवी दुर्गा की अंतिम शक्ति है, जो सभी सिद्धियों की दात्री देने वाली है। पुरानी कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने उनकी कठिन तपस्या की, तो देवी प्रसन्न होकर प्रकट हुई और शिव जी को आठ सिद्धियाँ प्रदान की, जिससे शिव जी अर्ध नारीश्वर कहलाए। वे कमल पर विराजमान है और ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवताओं को शक्ति प्रदान करती है।
माँ सिद्धिदात्री पृथ्वी पर महिषासुर के अत्याचार जब बढ़ा, देवताओं ने भगवान शिव और विष्णु जी की सहायता मांगी। इस समस्या के समाधान के लिए सभी देवताओं के तेज से माता सिद्धिदात्री की उत्पत्ति हुई थी।
माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्त होती है। इस दिन कन्या पूजन करने से माता रानी अत्यंत प्रसन्न होती है और घर में सुख समृद्धि का वास होता है।
माँ सिद्धिदात्री की पूजा के लिए मुख्य मंत्र हैं:
- “ओम देवी सिद्धिदात्र्यै नमः”
- “या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमो नमः”
आप इन मंत्रों का जाप ग्यारह, इक्कीस या एक सौ आठ बार कर सकते हैं, जैसी आपकी श्रद्धा है। लेकिन जब भी करें, भाव से करें और अच्छी इंटेंशन के साथ करें। माँ सिद्धिदात्री आपको जरूर आशीर्वाद देंगी और आपके अच्छे इंटेंशन माँ तक जरूर पहुँचते हैं।
माँ के मंत्र जाप आप कितने भी करें, लेकिन अच्छी इंटेंशन के साथ करें, अच्छे भाव के साथ करें। उनका आशीर्वाद आपको जरूर मिलेगा। अगर आप किसी भी परेशानी में हैं, किसी भी आपदा में हैं, आप पूजा नहीं कर पा रहे हैं, तो उस चीज को परेशान नहीं होना है। आप जहाँ भी बैठे हैं, एक मानसिक जाप करें, मानसिक मंत्रों का जाप करें और माँ सिद्धिदात्री को प्रार्थना करें, पूजा करें और अपनी परेशानी बताएं। माँ सिद्धिदात्री आपको जरूर आशीर्वाद देंगी। 😊









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